Publish Date: Fri, 02 Sep 2022 (17:50 IST)
Updated Date: Fri, 02 Sep 2022 (19:23 IST)
नानापरिमळ दुर्वा शेंदूर शमिपत्रें।
लाडू मोद्क अन्ने परिपूरित पात्रें।
ऎसे पूजन केल्या बीजाक्षरमंत्रे।
अष्टहि सिद्धी नवनिधी देसी क्षणमात्रें॥१॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।
तुझे गुण वर्णाया मज कैची स्फ़ूर्ती ॥धृ.॥
तुझे ध्यान निरंतर जे कोणी करिती।
त्यांची सकलही पापे विघ्नेंही हरती।
वाजी वारण शिबिका सेवक सुत युवती।
सर्वहि पावती अंती भवसागर तरती॥ जय देव.॥२॥
शरणांगत सर्वस्वें भजती तव चरणी।
कीर्ती तयांची राहे जोवर शशितरणि।
त्रैलोक्यी ते विजयी अदभूत हे करणी।
गोसावीनंदन रत नामस्मरणी।
जय देव जय देव.॥३॥