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Shri Shankar Aarti श्री शंकराची आरती

shiv shankar
सोमवार, 1 ऑगस्ट 2022 (08:17 IST)
लवथवती विक्राळा ब्रह्मांडी माळा ।
वीषें कंठ काळा त्रिनेत्रीं ज्वाळा ॥
लावण्यसुंदर मस्तकीं बाळा ।
तेथुनियां जल निर्मळ वाहे झुळझूळां ॥ १ ॥
 
जय देव जय देव जय श्रीशंकरा ।
आरती ओवाळूं तुज कर्पूरगौरा ॥ ध्रु० ॥
 
कर्पूरगौरा भोळा नयनीं विशाळा ।
अर्धांगीं पार्वती सुमनांच्या माळा ॥
विभुतीचें उधळण शितिकंठ नीळा ।
ऐसा शंकर शोभे उमावेल्हाळा ॥ जय देव० ॥ २ ॥
 
देवीं दैत्य सागरमंथन पै केलें ।
त्यामाजीं जें अवचित हळाहळ उठिलें ॥
तें त्वां असुरपणें प्राशन केलें ।
नीळकंठ नाम प्रसिद्ध झालें ॥ जय देव० ॥ ३ ॥
 
व्याघ्रांबर फणिवरधर सुंदर मदनारी ।
पंचानन मनमोहन मुनिजनसुखकारी ॥
शतकोटीचें बीज वाचे उच्चारी ।
रघुकुळटिळक रामदासा अंतरीं ॥ जय देव जय देव० ॥ ४ ॥
 
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जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥
 
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥
 
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥
 
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥
 
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥
 
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥
 
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥
 
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥
 
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥
 
जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा|
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा...॥

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