Publish Date: Wed, 03 Jan 2024 (12:29 IST)
Updated Date: Sat, 06 Jan 2024 (17:29 IST)
स्कंद पुराणांत गोकर्ण महात्म्यमध्ये उत्तरखंडात " श्री आर्यादुर्गा महात्म्य " वर्णन केले आहे.
श्री आर्यादुर्गा देवीची आरती
जय देवी जय देवी जय आर्यादुर्गे श्री आर्यादुर्गे
भक्तांना ताराया धावत ये वेगे
जय देवी जय देवी...
दीन जनांनी स्मरता दैन्या तू हरसी।
तुझिया भक्तालागी दर्शन तू देसी।
अखिल चराचर विश्वामाजी तू वरसी।
दुष्ट जनांचे दुर्गे निर्दालन करिसी।।1।।
जय देवी जय देवी...
सद्भावाने तुजला जे कोणी भजती।
त्यांसी संतत संपद सौख्याला देसी।
दुर्धर आधि व्याधी त्यांची तू हरसी।
ऐसी करुणा मूर्ती विलस नव जगती।।2।।
जय देवी जय देवी...
स्वरुप कौमारी तू ब्रम्हचरीणी।
सकलही त्रैल्योक्याची होसी तू जननी।
सभोवताली तुझिया तेजोबल नामी।
भक्तांलागी वससी तू हसोळग्रामी।।3।।
जय देवी जय देवी...
दुर्गे सर्वांची तू कुलस्वामिनी होसी।
म्हणूनी आम्ही आलो तुझिया भेटीसी।
सज्जन संगत तैसी सद्बुद्धी देई।
इतुकी आर्यादर्गे विनंती तव पायी।।4।।
जय देवी जय देवी...
मार्गशीर्ष वहा अष्टमीच्या दिवशी।
भगिनी नवदुर्गा तव येते भेटिसी।
उत्सव उत्साहाने बह सकलही जन करती।
दास विनायक तरला तव गाऊनिया किर्ती।।5।।
जय देवी जय देवी जय आर्यादुर्गे श्री आर्यादुर्गे
भक्तांना ताराया धावत ये वेगे
जय देवी जय देवी...
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Publish Date: Wed, 03 Jan 2024 (12:29 IST)
Updated Date: Sat, 06 Jan 2024 (17:29 IST)