Dharma Sangrah

श्री भैरव चालीसा Shri Bhairav Chalisa

Webdunia
शनिवार, 27 नोव्हेंबर 2021 (12:51 IST)
॥ दोहा ॥
श्री गणपति गुरु गौरी पद
प्रेम सहित धरि माथ ।
चालीसा वंदन करो
श्री शिव भैरवनाथ ॥
 
श्री भैरव संकट हरण
मंगल करण कृपाल ।
श्याम वरण विकराल वपु
लोचन लाल विशाल ॥
 
॥ चौपाई ॥
जय जय श्री काली के लाला ।
जयति जयति काशी-कुतवाला ॥
 
जयति बटुक-भैरव भय हारी ।
जयति काल-भैरव बलकारी ॥
 
जयति नाथ-भैरव विख्याता ।
जयति सर्व-भैरव सुखदाता ॥
 
भैरव रूप कियो शिव धारण ।
भव के भार उतारण कारण ॥
 
भैरव रव सुनि हवै भय दूरी ।
सब विधि होय कामना पूरी ॥
 
शेष महेश आदि गुण गायो ।
काशी-कोतवाल कहलायो ॥
 
जटा जूट शिर चंद्र विराजत ।
बाला मुकुट बिजायठ साजत ॥
 
कटि करधनी घुंघरू बाजत ।
दर्शन करत सकल भय भाजत ॥
 
जीवन दान दास को दीन्ह्यो ।
कीन्ह्यो कृपा नाथ तब चीन्ह्यो ॥
 
वसि रसना बनि सारद-काली ।
दीन्ह्यो वर राख्यो मम लाली ॥
 
धन्य धन्य भैरव भय भंजन ।
जय मनरंजन खल दल भंजन ॥
 
कर त्रिशूल डमरू शुचि कोड़ा ।
कृपा कटाक्ष सुयश नहिं थोडा ॥
 
जो भैरव निर्भय गुण गावत ।
अष्टसिद्धि नव निधि फल पावत ॥
 
रूप विशाल कठिन दुख मोचन ।
क्रोध कराल लाल दुहुं लोचन ॥
 
अगणित भूत प्रेत संग डोलत ।
बम बम बम शिव बम बम बोलत ॥
 
रुद्रकाय काली के लाला ।
महा कालहू के हो काला ॥
 
बटुक नाथ हो काल गंभीरा ।
श्‍वेत रक्त अरु श्याम शरीरा ॥
 
करत नीनहूं रूप प्रकाशा ।
भरत सुभक्तन कहं शुभ आशा ॥
 
रत्‍न जड़ित कंचन सिंहासन ।
व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सुआनन ॥
 
तुमहि जाइ काशिहिं जन ध्यावहिं ।
विश्वनाथ कहं दर्शन पावहिं ॥
 
जय प्रभु संहारक सुनन्द जय ।
जय उन्नत हर उमा नन्द जय ॥
 
भीम त्रिलोचन स्वान साथ जय ।
वैजनाथ श्री जगतनाथ जय ॥
 
महा भीम भीषण शरीर जय ।
रुद्र त्रयम्बक धीर वीर जय ॥
 
अश्‍वनाथ जय प्रेतनाथ जय ।
स्वानारुढ़ सयचंद्र नाथ जय ॥
 
निमिष दिगंबर चक्रनाथ जय ।
गहत अनाथन नाथ हाथ जय ॥
 
त्रेशलेश भूतेश चंद्र जय ।
क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय ॥
 
श्री वामन नकुलेश चण्ड जय ।
कृत्याऊ कीरति प्रचण्ड जय ॥
 
रुद्र बटुक क्रोधेश कालधर ।
चक्र तुण्ड दश पाणिव्याल धर ॥
 
करि मद पान शम्भु गुणगावत ।
चौंसठ योगिन संग नचावत ॥
 
करत कृपा जन पर बहु ढंगा ।
काशी कोतवाल अड़बंगा ॥
 
देयं काल भैरव जब सोटा ।
नसै पाप मोटा से मोटा ॥
 
जनकर निर्मल होय शरीरा ।
मिटै सकल संकट भव पीरा ॥
 
श्री भैरव भूतों के राजा ।
बाधा हरत करत शुभ काजा ॥
 
ऐलादी के दुख निवारयो ।
सदा कृपाकरि काज सम्हारयो ॥
 
सुन्दर दास सहित अनुरागा ।
श्री दुर्वासा निकट प्रयागा ॥
 
श्री भैरव जी की जय लेख्यो ।
सकल कामना पूरण देख्यो ॥
 
॥ दोहा ॥
जय जय जय भैरव बटुक स्वामी संकट टार ।
कृपा दास पर कीजिए शंकर के अवतार ॥

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