Marathi Biodata Maker

Shri Chandra Dev Chalisa चंद्रदेव चालीसा याचे पठण केल्याने मानसिक विकार दूर होतात

Webdunia
सोमवार, 6 ऑक्टोबर 2025 (11:30 IST)
ज्याप्रमाणे ग्रहांचा राजा सूर्यदेवाची पूजा करणे फायदेशीर मानले जाते, त्याचप्रमाणे धार्मिक शास्त्रांमध्ये चंद्रदेवाची पूजा करणे पुण्यपूर्ण मानले जाते. शिवाय, इतर हिंदू देवतांप्रमाणे, धर्मग्रंथांमध्ये केवळ चंद्रदेवाचे वर्णनच नाही तर त्यांच्याशी संबंधित मंत्र, स्तोत्रे आणि चालीसा देखील आहेत. ज्योतिषशास्त्रानुसार, चंद्रदेव मन आणि मेंदूचा कारक मानला जातो. असे म्हटले जाते की कुंडलीत चंद्रदेव शुभ स्थितीत असणे आवश्यक आहे, कारण जर ते शुभ नसेल तर व्यक्तीला विविध मानसिक विकारांशी झुंजावे लागते. तर, चंद्रदेव चालीसा बद्दल जाणून घेऊया, ज्या जपामुळे चंद्रदेवाचे आशीर्वाद मिळतात.
 
शीश नवा अरिहंत को, सिद्धन करूं प्रणाम।
उपाध्याय आचार्य का, ले सुखकारी नाम।।
सर्व साधु और सरस्वती, जिन मंदिर सुखकर।
चन्द्रपुरी के चन्द्र को, मन मंदिर में धार।।
 
।। चौपाई ।।
जय-जय स्वामी श्री जिन चन्दा, तुमको निरख भये आनन्दा। तुम ही प्रभु देवन के देवा, करूँ तुम्हारे पद की सेवा।।
वेष दिगम्बर कहलाता है, सब जग के मन भाता है। नासा पर है द्रष्टि तुम्हारी, मोहनि मूरति कितनी प्यारी।।
 
तीन लोक की बातें जानो, तीन काल क्षण में पहचानो। नाम तुम्हारा कितना प्यारा , भूत प्रेत सब करें निवारा।।
तुम जग में सर्वज्ञ कहाओ, अष्टम तीर्थंकर कहलाओ।। महासेन जो पिता तुम्हारे, लक्ष्मणा के दिल के प्यारे।।
 
तज वैजंत विमान सिधाये , लक्ष्मणा के उर में आये। पोष वदी एकादश नामी , जन्म लिया चन्दा प्रभु स्वामी।।
मुनि समन्तभद्र थे स्वामी, उन्हें भस्म व्याधि बीमारी। वैष्णव धर्म जभी अपनाया, अपने को पण्डित कहाया।।
 
कहा राव से बात बताऊं , महादेव को भोग खिलाऊं। प्रतिदिन उत्तम भोजन आवे , उनको मुनि छिपाकर खावे।।
इसी तरह निज रोग भगाया , बन गई कंचन जैसी काया। इक लड़के ने पता चलाया , फौरन राजा को बतलाया।।
 
तब राजा फरमाया मुनि जी को , नमस्कार करो शिवपिंडी को। राजा से तब मुनि जी बोले, नमस्कार पिंडी नहिं झेले।।
राजा ने जंजीर मंगाई , उस शिवपिंडी में बंधवाई। मुनि ने स्वयंभू पाठ बनाया , पिंडी फटी अचम्भा छाया।।
 
चन्द्रप्रभ की मूर्ति दिखाई, सब ने जय-जयकार मनाई। नगर फिरोजाबाद कहाये , पास नगर चन्दवार बताये।।
चन्द्रसैन राजा कहलाया , उस पर दुश्मन चढ़कर आया। राव तुम्हारी स्तुति गई , सब फौजो को मार भगाई।।
 
दुश्मन को मालूम हो जावे , नगर घेरने फिर आ जावे। प्रतिमा जमना में पधराई , नगर छोड़कर परजा धाई।।
बहुत समय ही बीता है कि , एक यती को सपना दीखा। बड़े जतन से प्रतिमा पाई , मन्दिर में लाकर पधराई।।
 
वैष्णवों ने चाल चलाई , प्रतिमा लक्ष्मण की बतलाई। अब तो जैनी जन घबरावें , चन्द्र प्रभु की मूर्ति बतावें।।
चिन्ह चन्द्रमा का बतलाया , तब स्वामी तुमको था पाया। सोनागिरि में सौ मन्दिर हैं , इक बढ़कर इक सुन्दर हैं।।
 
समवशरण था यहां पर आया , चन्द्र प्रभु उपदेश सुनाया। न्द्र प्रभु का मंदिर भारी , जिसको पूजे सब नर - नारी।।
सात हाथ की मूर्ति बताई , लाल रंग प्रतिमा बतलाई। मंदिर और बहुत बतलाये , शोभा वरणत पार न पाये।।
 
पार करो मेरी यह नैया , तुम बिन कोई नहीं खिवैया। प्रभु मैं तुमसे कुछ नहीं चाहूं , भव - भव में दर्शन पाऊँ।।
मैं हूं स्वामी दास तिहारा , करो नाथ अब तो निस्तारा। स्वामी आप दया दिखलाओ , चन्द्रदास को चन्द्र बनाओ।।
 
 ।।सोरठ।।
नित चालीसहिं बार , पाठ करे चालीस दिन। खेय सुगन्ध अपार , सोनागिर में आय के।।
होय कुबेर सामान , जन्म दरिद्री होय जो। जिसके नहिं संतान , नाम वंश जग में चले।।

संबंधित माहिती

सर्व पहा

नवीन

गुरुवारी व्रत करण्यापूर्वी जाणून घ्या महत्त्वाचे नियम, पूर्ण होतील सर्व इच्छा

आर्थिक चणचण दूर होणार! गुरुवारी करा तुळशीचे ४ सोपे तोडगे

अपरा एकादशी व्रत कथा Apra Ekadashi 2026 Vrat katha

Apara Ekadashi Vrat 2026 अपरा एकादशी पूजा विधी तसेच महत्त्व जाणून घ्या

युगे अठ्ठावीस विठ्ठल आरती

सर्व पहा

नक्की वाचा

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Jayanti 2026 Speech in Marathi धर्मवीर छत्रपती संभाजी महाराज जयंती भाषण

शरीराला उर्जावान ठेवण्यासाठी, दररोज या योगांचा सराव करा

पंचतंत्र : मूर्खांचा समूह

घरात भाजी नसेल तर पटकन बनवा साधी सोपी व झटपट होणारी कुरडईची भाजी : मराठमोळी चव!

Vastu Tips झोपण्याची योग्य दिशा तुमचे नशीब बदलू शकते

पुढील लेख
Show comments