!! दोहा !! गणपति की कर वंदना,गुरु चरनन चितलाय। प्रेतराज जी का लिखूं,चालीसा हरषाय॥ जय जय भूताधिप प्रबल,हरण सकल दु:ख भार। वीर शिरोमणि जयति,जय प्रेतराज सरकार॥ ॥ चौपाई ॥ जय जय प्रेतराज जग पावन।महा प्रबल त्रय ताप नसावन॥ विकट वीर करुणा के सागर।भक्त कष्ट हर सब गुण आगर॥ ...