बगलामुखी देवी आरती जय जयति सुखदा, सिद्धिदा, सर्वार्थ – साधक शंकरी। स्वाहा, स्वधा, सिद्धा, शुभा, दुर्गानमो सर्वेश्वरी ।। जय सृष्टि-स्थिति-कारिणि-संहारिणि साध्या सुखी। शरणागतो-अहं त्राहि माम् , मां त्राहि माम् बगलामुखी।। जय प्रकृति-पुरूषात्मक-जगत-कारण-करणि आनन्दिनी। विद्या-अविद्या, सादि-कादि, अनादि ब्रह्म-स्वरूपिणी।। ऐश्वर्य-आत्मा-भाव-अष्टम, अंग परमात्मा सखी। शरणागतो-अहं त्राहि माम्, मां त्राहि माम् बगलामुखी।। ...