जय देवी मंगळागौरी। ओंवाळीन सोनियाताटीं।। रत्नांचे दिवे। माणिकांच्या वाती। हिरेया ज्योती।।धृ।। मंगळमूर्ती उपजली कार्या। प्रसन्न झाली अल्पायुषी राया।। तिष्ठली राज्यबाळी। अयोषण द्यावया। ।1।। पूजेला ग आणिती जाईजुईच्या कळ्या। सोळा तिकटीं सोळा दूर्वा।। सोळा परींची पत्री। जाई जुई आबुल्या शेवंती नागचांफे।। पारिजातकें मनोहरें। नंदेटें तगरें। पूजेला ग आणिली।।2।। ...