पवन मंद सुगंध शीतल हेम मंदिर शोभितम । निकट गंगा बहत निर्मल श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम ।। शेष सुमिरन करत निशदिन धरत ध्यान महेश्वरम । श्री वेद ब्रह्मा करत स्तुति श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम ।। इंद्र चंद्र कुबेर धुनि कर धूप दीप प्रकाशितम । सिद्ध मुनिजन करत जै जै बद्रीनाथ...