rashifal-2026

श्री दुर्गा देवी स्तोत्रम्

Webdunia
बुधवार, 6 ऑक्टोबर 2021 (16:58 IST)
श्री गणेशाय नमः|
नगरी प्रवेशले पंडुनंदन | तो देखिले दुर्गास्थान |
धर्मराजा करी स्तवन | जगदंबेचे तेधवा ||१||
जय जय दुर्गे भुवनेश्वरी | यशोदागर्भसंभवकुमारी |
इन्दिरारमणसहोदरी | नारायणी चंडीके अंबीके ||२||
जय जय जगदंबे भवानी | मूळप्रकृती प्रणवरुपिणी |
ब्रह्मानंदपददायिनी | चिद्विलासिनी जगदंबे ||३||
जय जय धराधरकुमारी | सौभाग्यगंगे त्रिपुरसुंदरी| 
हेरंबजननी अंतरी |प्रवेशी तू अमुचिया ||४||
भक्तहृदयारविंद्रभ्रमरी | तुझिया कृपावलोकने निर्धारी |
अतिमूढ तो निगमार्थ करी | काव्यरचना अद्भुत ||५||
तुझिया आपंगते करून् | जन्मांधासी येती नयन् |
पांगुळ धावे पवनाहून | करी गमन त्वरेने ||६||
जन्माधाराभ्य जो मुका | होय वाचस्पतीसम बोलका | 
तू स्वानंदसरोवरमराळिका | होसी भाविका सुप्रसन् ||७||
ब्रम्हानंदे आदि जननी | तव कृपेची नौका करुनी |
दुस्तर भवसिंधु लंघोनी | निवृत्ती तटा नेईजे ||८||
जय जय आदि कुमारीके | जय जय मूळपीठनायिके |
सकल सौभाग्यदायिके | जगदंबिके मूळप्रकृती ||९||
जय जय भर्गप्रियभवानी | भवनाशके भक्तवरदायिनी |
समुद्रकारके हिमनगनंदिनी | त्रिपुरसुंदरी महामाये ||१०||
जय आनंदकासारमराळिके | पद्मनयन दुरितकानन पावके |
त्रिविध ताप भवमोचके | सर्व व्यापके मृडानी ||११||
शिवमानस कनक लतिके | जय चातुर्य चंपक कलिके |
शुंभनिशुंभ दैत्यांतके | निजजनपालके अपर्णे ||१२||
तव मुखकमल शोभा देखोनी | इंदुबिंब गेले गळोनी |
ब्रम्हादिके बाळे तान्ही | स्वानंदसदनी नीजवीसी ||१३||
जीव शीव दोन्ही बालके | अंबे तुवा नीर्मीली कौतुके |
जीव तुझे स्वरुप नोळखे | म्हणोनी पडला आवर्ती ||१४||
शीव तुझे स्मरणी सावचित्त | म्हणोनी अंबे तो नित्यमुक्त |
स्वनंदपद हातासी येत् | कृपे तुझ्या जननीये ||१५||
मेळवुनी पंचभूतांचा मेळ् | तुवा रचिला ब्रह्माडगोळ |
इच्छा परतता तत्काळ | क्षणात निर्मूळ करीसी तू ||१६||
अनंतबालसूर्य श्रेणी | तव प्रभेमाजी गेल्या विरोनी |
सकल सौभाग्य शुभकल्याणी | रमा रमणे वरप्रदे ||१७||
शंबरारि रिपुवल्लभे | त्रैलोक्यनगरारंभस्तंभे |
आदिमाये आदिप्रभे | सकळारंभे मूळप्रकृती ||१८||
जय जय करुणामृतसरीते | निजभक्तपालके गुणभरीते | 
अनंत ब्रह्मांडपालके कृपावंते | आदिमाये अपर्णे ||१९||
सच्चिदानंद प्रणवरुपिणी | चराचरजीव सकलव्यापिणी |
सर्गस्थित्यंतकारिणी | भवमोचनी महामाये ||२०||
ऐकोनी धर्मराजाचे स्तवन् | दुर्गादेवी झाली प्रसन्न | 
म्हणे तव शत्रू संहारून् | रीज्यी स्थापीन धर्मा तू ते ||२१||
तुम्ही वास करावा येथे | प्रकटो नेदी जनाते | 
शत्रू क्षय पावती तुमचे हाते | सुख अद्भुत तुम्हा होय ||२२||
तुवा जे केले स्तोत्रपठण् | हे जो करील पठण श्रवण ||
त्यासी सर्वदा रक्षीन् | अंतर्बाह्य निजांगे||२३||
 
इति श्री दुर्गास्तोत्र समाप्त

संबंधित माहिती

सर्व पहा

नवीन

शनिवारची आरती

Vasant Panchami 2026 वसंत पंचमीचा उत्सव कधी साजरा केला जाईल?

दशरथकृत शनी स्तोत्राने समस्या होतील दूर, मिळेल शनिदोषापासून मुक्ती

Sankranti 2026 Daan मकर संक्रांती २०२६ राशीनुसार दान करा

शुक्रवारी या स्त्रोताचे पाठ केल्याने दारिद्र्य नाहीसे होते

सर्व पहा

नक्की वाचा

Morning Mantras सकाळी उठल्यावर या 4 मंत्रांचा उच्चार करा, सर्व अडचणी दूर होतील

उत्तम करिअर घडवण्यासाठी या गोष्टी लक्षात ठेवा

तुळशीचे झाड काळे पडत आहे का? हे कारण असू शकते का? प्रतिबंधात्मक टिप्स जाणून घ्या

साप्ताहिक राशिफल 04 ते 10 जानेवारी 2026

मकरसंक्रांती रेसिपी : सोपी तीळ-गुळाची बर्फी

पुढील लेख
Show comments