श्रीमद्वेदान्तदेशिककृतं महावीरवैभवम् श्रीमान् वेन्कटनाथार्यः कवितार्किककेसरी वेदान्ताचार्यवर्यो मे सन्निधत्तां सदा हृदि । जयत्याश्रितसंत्रास-ध्वान्त-विद्ध्वंसनोदयः प्रभावान् सीतया देव्या परमव्योमभास्करः॥ जय जय महावीर महाधीरधौरेय, देवासुरसमरसमय- समुदित-निर्ज्जरनिर्द्धारित-निरवधिक-माहात्म्य, दशवदनदमित-दैवतपरिषदभ्यर्थित-दाशरथिभाव, दिनकरकुलकमलदिवाकर, दिविषदधिपति- रणसहचरणचतुर-दशरथ-चरमऋण-विमोचन, कोसलसुता-कुमारभाव-कञ्चुकित- कारणाकार, कौमारकेलि-गोपायित- कौशिकाध्वर-रणाध्वरधुर्य- भव्यदिव्यास्त्रबृन्द्ववन्दित, प्रणतजन-विमतविमथन- दुर्ललितदोर्ललित, तनुतर-विशिखविताडन-विघटित- विशरारुशरारुताटकाताटकेय, जडकिरणशकलधर-जटिल-नटपति-मुकुटतट-नटनपटु- विबुधसरिदतिबहुल-मधुगलन-ललितपदनलिनरज- उपमृदित-निजवृजिन-जहदुपलतनु- रुचिरपरममुनिवरयुवतिनुत, कुशिकसुतकथित-विदितनवविविधकथ, मैथिलनगर-सुलोचना-लोचन-चकोरचन्द्र, खण्डपरशु-कोदण्ड-प्रकाण्ड-खण्डनशौण्ड-भुजदण्ड, चण्डकरकिरण-पुण्डरीकवनरुचिलुण्ठकलोचन, मोचित-जनकहृदय-शङ्कातङ्क, परिहृत-निखिलनरपतिवरण- जनकदुहितृ-कुचतटविहरण-समुचितकरतल, शतकोटिशतगुणकठिन-परशुधर-मुनिवरकरधृत-दुरवनतम- निजधनुराकर्षण-प्रकाशित-पारमेष्ठ्य, क्रतुहरशिखरिकन्दुकविहृत्युन्मुख- जगदरुन्तुद-जितहरिदन्त-दिगिभदन्त-दन्तुरोरोन्त-...