✕
महाराष्ट्र माझा
ज्योतिष
ग्रह-नक्षत्रे
वास्तुशास्त्र
फेंगशुई
राशिभविष्य
जन्मदिवस आणि ज्योतिष
श्रीराम शलाका
टॅरो भविष्य
चौघड़िया
मासिक जुळत आहे
आजचा वाढदिवस
लाईफस्टाईल
प्रणय
सखी
योग
लव्ह स्टेशन
मराठी साहित्य
मराठी कविता
धर्म संग्रह
आरोग्य
व्हिडिओ
खाद्य संस्कृती
क्रिकेट
इतर खेळ
वास्तुशास्त्र
फ़ोटो गैलरी
शिवजयंती
Marathi
हिन्दी
English
தமிழ்
తెలుగు
മലയാളം
ಕನ್ನಡ
ગુજરાતી
महाराष्ट्र माझा
ज्योतिष
लाईफस्टाईल
धर्म संग्रह
आरोग्य
व्हिडिओ
खाद्य संस्कृती
क्रिकेट
वास्तुशास्त्र
फ़ोटो गैलरी
शिवजयंती
श्री नर्मदा चालीसा
Webdunia
मंगळवार, 4 फेब्रुवारी 2025 (12:15 IST)
॥ दोहा॥
देवि पूजित, नर्मदा,
महिमा बड़ी अपार ।
चालीसा वर्णन करत,
कवि अरु भक्त उदार॥
इनकी सेवा से सदा,
मिटते पाप महान ।
तट पर कर जप दान नर,
पाते हैं नित ज्ञान ॥
ALSO READ:
Maa Narmada Arti: नर्मदा आईची आरती
॥ चौपाई ॥
जय-जय-जय नर्मदा भवानी,
तुम्हरी महिमा सब जग जानी ।
अमरकण्ठ से निकली माता,
सर्व सिद्धि नव निधि की दाता ।
कन्या रूप सकल गुण खानी,
जब प्रकटीं नर्मदा भवानी ।
सप्तमी सुर्य मकर रविवारा,
अश्वनि माघ मास अवतारा ॥4
वाहन मकर आपको साजैं,
कमल पुष्प पर आप विराजैं ।
ब्रह्मा हरि हर तुमको ध्यावैं,
तब ही मनवांछित फल पावैं ।
दर्शन करत पाप कटि जाते,
कोटि भक्त गण नित्य नहाते ।
जो नर तुमको नित ही ध्यावै,
वह नर रुद्र लोक को जावैं ॥8
मगरमच्छा तुम में सुख पावैं,
अंतिम समय परमपद पावैं ।
मस्तक मुकुट सदा ही साजैं,
पांव पैंजनी नित ही राजैं ।
कल-कल ध्वनि करती हो माता,
पाप ताप हरती हो माता ।
पूरब से पश्चिम की ओरा,
बहतीं माता नाचत मोरा ॥12
शौनक ऋषि तुम्हरौ गुण गावैं,
सूत आदि तुम्हरौं यश गावैं ।
शिव गणेश भी तेरे गुण गवैं,
सकल देव गण तुमको ध्यावैं ।
कोटि तीर्थ नर्मदा किनारे,
ये सब कहलाते दु:ख हारे ।
मनोकमना पूरण करती,
सर्व दु:ख माँ नित ही हरतीं ॥16
कनखल में गंगा की महिमा,
कुरुक्षेत्र में सरस्वती महिमा ।
पर नर्मदा ग्राम जंगल में,
नित रहती माता मंगल में ।
एक बार कर के स्नाना,
तरत पिढ़ी है नर नारा ।
मेकल कन्या तुम ही रेवा,
तुम्हरी भजन करें नित देवा ॥20
जटा शंकरी नाम तुम्हारा,
तुमने कोटि जनों को है तारा ।
समोद्भवा नर्मदा तुम हो,
पाप मोचनी रेवा तुम हो ।
तुम्हरी महिमा कहि नहीं जाई,
करत न बनती मातु बड़ाई ।
जल प्रताप तुममें अति माता,
जो रमणीय तथा सुख दाता ॥24
चाल सर्पिणी सम है तुम्हारी,
महिमा अति अपार है तुम्हारी ।
तुम में पड़ी अस्थि भी भारी,
छुवत पाषाण होत वर वारि ।
यमुना मे जो मनुज नहाता,
सात दिनों में वह फल पाता ।
सरस्वती तीन दीनों में देती,
गंगा तुरत बाद हीं देती ॥28
पर रेवा का दर्शन करके
मानव फल पाता मन भर के ।
तुम्हरी महिमा है अति भारी,
जिसको गाते हैं नर-नारी ।
जो नर तुम में नित्य नहाता,
रुद्र लोक मे पूजा जाता ।
जड़ी बूटियां तट पर राजें,
मोहक दृश्य सदा हीं साजें ॥32
वायु सुगंधित चलती तीरा,
जो हरती नर तन की पीरा ।
घाट-घाट की महिमा भारी,
कवि भी गा नहिं सकते सारी ।
नहिं जानूँ मैं तुम्हरी पूजा,
और सहारा नहीं मम दूजा ।
हो प्रसन्न ऊपर मम माता,
तुम ही मातु मोक्ष की दाता ॥35
जो मानव यह नित है पढ़ता,
उसका मान सदा ही बढ़ता ।
जो शत बार इसे है गाता,
वह विद्या धन दौलत पाता ।
अगणित बार पढ़ै जो कोई,
पूरण मनोकामना होई ।
सबके उर में बसत नर्मदा,
यहां वहां सर्वत्र नर्मदा ॥40
॥ दोहा ॥
भक्ति भाव उर आनि के,
जो करता है जाप ।
माता जी की कृपा से,
दूर होत संताप॥
॥ इति श्री नर्मदा चालीसा ॥
ALSO READ:
श्री नर्मदा अष्टकम मराठी अर्थासहित
वेबदुनिया वर वाचा
मराठी ज्योतिष
लाईफस्टाईल
बॉलीवूड
मराठी बातम्या
संबंधित माहिती
श्री नर्मदा अष्टकम मराठी अर्थासहित
Narmada Parikrama नर्मदा परिक्रमा नियम आणि महत्त्व, संपूर्ण माहिती जाणून घ्या
मंगळवारी हनुमान मंत्राचा जाप केल्याने सर्व कष्ट होतील दूर
जयति जय जय माँ सरस्वती प्रार्थना
Shiv Chalisa : शिव चालीसा पाठ करा, इच्छित परिणाम मिळवा
सर्व पहा
नवीन
आरती मंगळवारची
५ मे मंगळवार आज अंगारक चतुर्थी, या प्रकारे करा गणेश, मारुती आणि मंगळ ग्रहाची पूजा
गौरीगिरीशस्तोत्रम्- Gaurigirisha Stotram
सोमवारी महामृत्युंजय जप करणे आरोग्यासाठी फायदेशीर
आरती सोमवारची
सर्व पहा
नक्की वाचा
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Jayanti 2026 Speech in Marathi धर्मवीर छत्रपती संभाजी महाराज जयंती भाषण
शरीराला उर्जावान ठेवण्यासाठी, दररोज या योगांचा सराव करा
पंचतंत्र : मूर्खांचा समूह
घरात भाजी नसेल तर पटकन बनवा साधी सोपी व झटपट होणारी कुरडईची भाजी : मराठमोळी चव!
Vastu Tips झोपण्याची योग्य दिशा तुमचे नशीब बदलू शकते
पुढील लेख
माँ नर्मदेचे उगमस्थान अमरकंटक
Show comments